AKI’s Poona College of Arts, Science and Commerce, Camp,
Pune-411001.
News Report: FDP on "Why Autonomy?" at Poona College
Date: 15-01-2025
Click here for the photo album
Poona College of Arts, Science, and
Commerce organized a highly impactful one-day Faculty Development Program (FDP)
on "Why Autonomy?" on 15th January 2025 in the college
conference hall. This program, conducted by the Internal Quality Assurance Cell
(IQAC) in collaboration with the Examination Department, aimed to explore the
significance of institutional autonomy in advancing educational excellence.
Program Highlights:
The event began with a recitation
from the Holy Quran by Mr. Imran Quraishi. Principal Dr. Iqbal Shaikh delivered
the welcome address, providing a comprehensive overview of Poona College and
emphasizing the transformative potential of autonomy in academics.
Vice-Principal Dr. Amjad Shaikh introduced the chief guest, Dr. Mahesh Kakade,
Director of the Board of Examinations and Evaluation, SPPU, highlighting his
academic and professional achievements.
Distinguished Guests:
- Chief Guest and Resource Person: Dr. Mahesh Kakade, Director, Board of
Examinations and Evaluation, SPPU.
- Guest of Honor: Dr. Gokuldas Lokhande, Assistant
Professor, Vidya Pratishthan’s College of Education, Ahilyanagar.
- Honored Guest: Mr. Pradeep Koli, Deputy Registrar,
Examination Department, SPPU.
Innovative Initiatives Highlighted:
The FDP showcased Poona College’s
innovative One-Click Question Papers and QR Code Initiative, a
pioneering system designed to simplify access to examination materials for over
3 lakh students across 500 Arts, Science, and Commerce colleges. With this
initiative, Poona College became the first college in the university to
make all question papers accessible at one click. This not only strengthens the
college’s reputation as a leader in academic and operational innovation but
also contributes to environmental sustainability and assists affiliated
colleges in NAAC compliance.
Keynote Address by Dr. Mahesh
Kakade:
Dr. Kakade’s session focused on the
pivotal role of autonomy in empowering institutions to enhance governance,
curriculum flexibility, and academic performance. Key takeaways from his
address include:
1.
Understanding
Autonomy: Dr. Kakade began by contextualizing
autonomy within the Indian higher education framework. He emphasized that
autonomy is a dynamic process enabling institutions to design their own
curriculum, innovate teaching methodologies, and evaluate students in alignment
with global standards.
2.
Benefits
of Autonomy:
o Curriculum Freedom: Institutions can tailor courses to meet emerging industry and
societal needs, fostering job-ready graduates.
o Academic Excellence: Flexibility to introduce interdisciplinary programs and modern
academic practices ensures innovation in education.
o Enhanced Governance: Autonomy empowers institutions to make decisions efficiently,
reducing bureaucratic delays and promoting accountability.
o Global Recognition: Autonomous institutions are better positioned to collaborate with
international universities, enhancing their global footprint.
3.
Challenges
and Mitigation Strategies: Dr. Kakade
acknowledged potential challenges associated with autonomy and proposed
solutions:
o Resistance to change within faculty and administrative systems.
o Need for significant investment in infrastructure and training.
o Ensuring transparency and accountability in autonomous governance.
o Capacity Building: Training faculty and staff to embrace new responsibilities.
o Collaborative Leadership: Encouraging participative decision-making to foster trust and
inclusivity.
o Strong Evaluation Mechanisms: Developing robust internal quality assurance systems to uphold
high academic standards.
4.
Role
of Examination Reforms in Autonomy: Drawing from
his expertise in examination administration, Dr. Kakade highlighted how
autonomous institutions can innovate their assessment systems. He commended
Poona College’s initiatives, such as the One-Click Question Papers and
QR Code system, as exemplary practices that align with autonomy’s goals of
efficiency and transparency.
5.
Call
to Action: Dr. Kakade concluded with an
inspiring call to action, urging institutions to adopt autonomy as a means of
redefining education and preparing students for the challenges of a rapidly
evolving world. He emphasized the collective responsibility of faculty,
administrators, and policymakers in driving this transformation.
Audience Engagement and Feedback:
The session witnessed active
participation from faculty members and educators. Dr. Kakade’s insights sparked
meaningful discussions on implementing autonomy and addressing related
challenges, leaving a lasting impact on all attendees.
Acknowledgments and Conclusion:
The program concluded with a vote of
thanks by Dr. Sayyad Vakeel, CEO of Poona College and FDP Coordinator. He
expressed gratitude to the chief guest, honored guests, and all participants
for their valuable contributions. The session was expertly compered by Dr.
Mohsin Shaikh from the Department of Geology, ensuring the program’s smooth
execution.
This FDP reinforced Poona College’s
commitment to academic excellence and innovation, paving the way for
transformative changes in education through institutional autonomy.
Around 100 faculty members were
benefitted from the faculty development program.
Photo 2. Dr. Mahesh Kakade, Director, Board of Examination and Evaluation, SPPU sharing his expertise and knowledge on ,” Why Autonomy” |
![]() |
Photo 3. Dr. Iqbal Shaikh Incharge Principal of Poona College giving a welcome address and sharing the needs and importance of autonomy.
Photo 4. The faculty members of Poona College attending the FDP.
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Hindi
पूना कॉलेज में ‘स्वायत्तता क्यों?’ विषय पर एफडीपी कार्यक्रम
दिनांक: 15-01-2025
पूना कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स ने 15 जनवरी 2025 को अपने कॉन्फ्रेंस हॉल में “स्वायत्तता क्यों?” विषय पर एक दिवसीय अत्यंत प्रभावशाली फैकल्टी विकास कार्यक्रम (एफडीपी) का आयोजन किया। यह कार्यक्रम आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) और परीक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने में संस्थागत स्वायत्तता के महत्व को समझाना था।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं:
कार्यक्रम की शुरुआत श्री इमरान कुरैशी द्वारा पवित्र कुरान के पाठ से हुई। प्राचार्य डॉ. इकबाल शेख ने स्वागत भाषण दिया, जिसमें उन्होंने पूना कॉलेज का संक्षिप्त परिचय दिया और शैक्षणिक क्षेत्र में स्वायत्तता की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया। उपप्राचार्य डॉ. अमजद शेख ने मुख्य अतिथि डॉ. महेश काकडे का शैक्षणिक और व्यावसायिक परिचय प्रस्तुत किया।
विशिष्ट अतिथि:
- मुख्य अतिथि एवं रिसोर्स पर्सन: डॉ. महेश काकडे,
निदेशक, संचालक,परीक्षा और मूल्यांकन बोर्ड, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू)।
- सम्मानित अतिथि: डॉ. गोकुलदास लोखंडे, सहायक प्रोफेसर, विद्या प्रतिष्ठान’स कॉलेज ऑफ एजुकेशन, अहिल्यानगर।
- अतिरिक्त सम्मानित अतिथि: श्री प्रदीप कोली, उप- कुलसचिव, परीक्षा विभाग, एसपीपीयू।
नवाचार संबंधी पहल: एफडीपी के दौरान, पूना कॉलेज की अभिनव “वन-क्लिक प्रश्न पत्र और क्यूआर कोड” पहल का अनावरण किया गया। इस पहल के तहत सभी प्रश्न पत्र एक क्लिक पर उपलब्ध कराए गए, जिससे पूना कॉलेज विश्वविद्यालय का ऐसा करने वाला पहला कॉलेज बन गया। यह पहल 500 कॉलेजों के 3 लाख से अधिक छात्रों को परीक्षा सामग्री तक सरल पहुंच प्रदान करती है। यह नवाचार न केवल शैक्षणिक और परिचालन उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देता है और संबद्ध कॉलेजों को एनएएसी अनुपालन में सहायता प्रदान करता है।
डॉ. महेश काकडे का मुख्य संबोधन:
डॉ. काकडे, संचालक,परीक्षा और मूल्यांकन बोर्ड, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय ने स्वायत्तता के महत्व पर केंद्रित सत्र में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला:
1.
स्वायत्तता की समझ: – डॉ. काकडे ने भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली के संदर्भ में स्वायत्तता को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह केवल एक स्थिति नहीं है, बल्कि एक गतिशील प्रक्रिया है, जो संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम डिजाइन करने, शिक्षण विधियों में नवाचार लाने और छात्रों के मूल्यांकन को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में सक्षम बनाती है।
2.
स्वायत्तता के लाभ:
o पाठ्यक्रम स्वतंत्रता: स्वायत्तता से संस्थान उद्योग और समाज की उभरती जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार कर सकते हैं।
o शैक्षणिक उत्कृष्टता: अंतःविषय कार्यक्रम और आधुनिक शैक्षणिक प्रथाओं को लागू करके नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
o बेहतर प्रशासन: स्वायत्तता संस्थानों को नौकरशाही की देरी को कम करने और कुशल निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।
o वैश्विक मान्यता: स्वायत्त संस्थान अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ बेहतर सहयोग कर सकते हैं।
3.
चुनौतियां और समाधान:
o बदलाव के प्रति संकाय और प्रशासनिक प्रणालियों का विरोध।
o बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण में निवेश की आवश्यकता।
o पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
o संकाय और कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण।
4.
परीक्षा सुधार की भूमिका:
o डॉ. काकडे ने बताया कि स्वायत्त संस्थान अपनी मूल्यांकन प्रणाली में नवाचार कर सकते हैं। उन्होंने पूना कॉलेज की “वन-क्लिक प्रश्न पत्र और क्यूआर कोड” पहल की सराहना की और इसे दक्षता और पारदर्शिता की दिशा में एक आदर्श कदम बताया।
5.
कार्यवाई के लिए आह्वान:
o डॉ. काकडे ने संस्थानों से शिक्षा को फिर से परिभाषित करने और छात्रों को तेजी से बदलती दुनिया के लिए तैयार करने के लिए स्वायत्तता अपनाने का आग्रह किया।
दर्शकों की प्रतिक्रिया और निष्कर्ष:
कार्यक्रम में उपस्थित संकाय और शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई। डॉ. काकडे के विचारों ने स्वायत्तता को लागू करने और चुनौतियों का समाधान खोजने पर सार्थक चर्चा को प्रेरित किया।
आभार प्रदर्शन: कार्यक्रम का समापन डॉ. सय्यद वकील, सीईओ और एफडीपी समन्वयक, द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहसिन शेख ने किया।
यह एफडीपी कार्यक्रम पूना कॉलेज की शैक्षणिक नवाचार और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो स्वायत्तता के माध्यम से शैक्षिक सुधार में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम से लगभग 100 प्रतिभागियों को लाभ हुआ।
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Marathi
बातमी अहवाल: "स्वायत्तता का?" वर एफडीपी पूना कॉलेजमध्ये
तारीख: 15-01-2025
पूना कॉलेज ऑफ आर्ट्स, सायन्स आणि कॉमर्सने 15 जानेवारी 2025 रोजी कॉलेजच्या कॉन्फरन्स हॉलमध्ये "स्वायत्तता
का?" या विषयावर एक दिवसीय शिक्षक विकास
कार्यक्रम (एफडीपी) आयोजित केला. हा कार्यक्रम अंतर्गत गुणवत्ता आश्वासन कक्ष (IQAC)
आणि परीक्षा विभागाच्या सहकार्याने आयोजित करण्यात आला होता,
ज्याचा उद्देश शैक्षणिक उत्कृष्टतेला प्रोत्साहन देण्यासाठी
संस्थात्मक स्वायत्ततेचे महत्त्व शोधणे होता.
कार्यक्रमाचे ठळक मुद्दे:
कार्यक्रमाची सुरुवात श्री. इम्रान कुरेशी यांनी पवित्र कुराणाचे पठण करून
केली. प्राचार्य डॉ. इक्बाल शेख यांनी स्वागत भाषण दिले, ज्यामध्ये पूना कॉलेजचा संपूर्ण आढावा दिला आणि शैक्षणिक
स्वायत्ततेच्या परिवर्तनशील क्षमतेवर भर दिला. उपप्राचार्य डॉ. अमजद शेख यांनी
प्रमुख पाहुणे डॉ. महेश काकडे, संचालक, परीक्षा मंडळ आणि मूल्यांकन, एसपीपीयू यांची ओळख
करून दिली आणि त्यांच्या शैक्षणिक आणि व्यावसायिक कामगिरीवर प्रकाश टाकला.
प्रमुख पाहुणे:
- प्रमुख पाहुणे आणि संसाधन व्यक्ती: डॉ. महेश काकडे, संचालक, परीक्षा मंडळ आणि
मूल्यांकन, एसपीपीयू.
- सन्माननीय पाहुणे: डॉ. गोकुलदास लोखंडे, सहायक प्राध्यापक, विद्या प्रतिष्ठान कॉलेज ऑफ एज्युकेशन,
अहिल्यानगर.
- सन्माननीय पाहुणे: श्री. प्रदीप कोळी, उप- कुलसचिव,
परीक्षा विभाग, एसपीपीयू.
नवीन उपक्रम हायलाइट्स:
एफडीपीने पूना कॉलेजच्या नाविन्यपूर्ण
वन-क्लिक प्रश्नपत्रिका आणि क्यूआर कोड उपक्रमाचे प्रदर्शन केले, ज्यामुळे 3 लाखांहून अधिक
विद्यार्थ्यांना परीक्षा साहित्य सुलभपणे उपलब्ध करून देण्यासाठी एक अग्रगण्य
प्रणाली तयार करण्यात आली. या उपक्रमामुळे पूना कॉलेज विद्यापीठातील सर्व प्रश्नपत्रिका एका
क्लिकवर उपलब्ध करून देणारे पहिले कॉलेज बनले. यामुळे कॉलेजची शैक्षणिक आणि
कार्यात्मक नवकल्पनांमध्ये अग्रणी म्हणून प्रतिष्ठा वाढली आहे, तसेच पर्यावरणीय टिकाऊपणा आणि संलग्न महाविद्यालयांना एनएएसी अनुपालनात
मदत केली आहे.
डॉ. महेश काकडे यांचे मुख्य भाषण:
डॉ. काकडे संचालक,परीक्षा और मूल्यांकन बोर्ड, सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ यांच्या सत्रात स्वायत्ततेच्या महत्त्वपूर्ण भूमिकेवर लक्ष केंद्रित केले गेले, ज्यामुळे संस्थांना शासन, अभ्यासक्रम लवचिकता आणि शैक्षणिक कामगिरी सुधारण्यासाठी सक्षम केले जाते. त्यांच्या भाषणातील मुख्य मुद्दे:
1. स्वायत्ततेचे समजून घेणे: डॉ. काकडे यांनी भारतीय उच्च शिक्षणाच्या चौकटीत स्वायत्ततेचे संदर्भ दिले.
त्यांनी स्पष्ट केले की स्वायत्तता ही एक गतिशील प्रक्रिया आहे जी संस्थांना
त्यांच्या स्वतःच्या अभ्यासक्रमाची रचना करण्यास, अध्यापन पद्धतींमध्ये
2. नवकल्पना करण्यास आणि जागतिक मानकांशी सुसंगत विद्यार्थ्यांचे मूल्यांकन करण्यास सक्षम करते.
3. स्वायत्ततेचे फायदे:
o
अभ्यासक्रम स्वातंत्र्य: संस्थांना उदयोन्मुख उद्योग आणि सामाजिक गरजा पूर्ण
करण्यासाठी अभ्यासक्रम तयार करण्याची मुभा आहे, ज्यामुळे
नोकरीसाठी तयार पदवीधर तयार होतात.
o
शैक्षणिक उत्कृष्टता: आंतरविषयक कार्यक्रम आणि आधुनिक शैक्षणिक पद्धती सादर
करण्याची लवचिकता शिक्षणात नवकल्पना सुनिश्चित करते.
o
सुधारित शासन: स्वायत्तता संस्थांना कार्यक्षमतेने निर्णय घेण्यास सक्षम करते, प्रशासकीय विलंब कमी करते आणि जबाबदारीला प्रोत्साहन देते.
o
जागतिक मान्यता: स्वायत्त संस्थांना आंतरराष्ट्रीय विद्यापीठांशी सहकार्य
करण्याची चांगली संधी आहे, ज्यामुळे त्यांचा जागतिक ठसा वाढतो.
4. आव्हाने आणि उपाययोजना: डॉ. काकडे यांनी स्वायत्ततेशी संबंधित संभाव्य आव्हानांची कबुली दिली आणि
उपाय सुचवले:
o
शिक्षक आणि प्रशासकीय प्रणालींमध्ये बदलाचा प्रतिकार.
o
पायाभूत सुविधा आणि प्रशिक्षणात महत्त्वपूर्ण गुंतवणुकीची गरज.
o
स्वायत्त शासनात पारदर्शकता आणि जबाबदारी सुनिश्चित करणे.
o
क्षमता निर्माण: नवीन जबाबदाऱ्या स्वीकारण्यासाठी शिक्षक आणि कर्मचाऱ्यांना
प्रशिक्षण देणे.
o
सहभागी नेतृत्व: विश्वास आणि समावेशिता वाढवण्यासाठी सहभागी निर्णय घेण्यास
प्रोत्साहन देणे.
o
मजबूत मूल्यांकन यंत्रणा: उच्च शैक्षणिक मानक राखण्यासाठी मजबूत अंतर्गत
गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली विकसित करणे.
5. स्वायत्ततेतील परीक्षा सुधारणांची भूमिका: परीक्षा प्रशासनातील त्यांच्या तज्ज्ञतेवरून, डॉ. काकडे यांनी स्वायत्त संस्थांना त्यांच्या मूल्यांकन प्रणालींमध्ये
नवकल्पना कशी करता येईल हे स्पष्ट केले. त्यांनी पूना कॉलेजच्या उपक्रमांचे कौतुक केले, जसे की वन-क्लिक प्रश्नपत्रिका आणि क्यूआर कोड प्रणाली, जे कार्यक्षमता आणि पारदर्शकतेच्या स्वायत्ततेच्या उद्दिष्टांशी सुसंगत
असलेल्या आदर्श पद्धती आहेत.
6. कारवाईसाठी आवाहन: डॉ. काकडे यांनी प्रेरणादायी आवाहन करून स्वायत्ततेला शिक्षणाचे पुनर्रचना
करण्याचे आणि विद्यार्थ्यांना वेगाने बदलणाऱ्या जगाच्या आव्हानांसाठी तयार
करण्याचे साधन म्हणून स्वीकारण्याचे आवाहन केले. या परिवर्तनाला चालना देण्यासाठी
शिक्षक, प्रशासक आणि धोरणकर्त्यांची सामूहिक
जबाबदारी त्यांनी अधोरेखित केली.
प्रेक्षकांचा सहभाग आणि अभिप्राय:
सत्रात शिक्षक आणि शिक्षणतज्ज्ञांचा सक्रिय सहभाग पाहायला मिळाला. डॉ. काकडे
यांच्या अंतर्दृष्टींनी स्वायत्ततेची अंमलबजावणी आणि संबंधित आव्हानांवर चर्चा
केली, ज्यामुळे सर्व उपस्थितांवर दीर्घकाळ
टिकणारा प्रभाव पडला.
आभार आणि निष्कर्ष:
कार्यक्रमाचा समारोप पूना कॉलेजचे
सीईओ आणि एफडीपी समन्वयक डॉ. सय्यद वकील यांनी आभार प्रदर्शनाने केला. प्रमुख
पाहुणे, सन्माननीय पाहुणे आणि सर्व सहभागींच्या
मौल्यवान योगदानाबद्दल त्यांनी कृतज्ञता व्यक्त केली. भूगोल विभागाचे डॉ. मोहसिन
शेख यांनी कार्यक्रमाचे उत्कृष्ट संचालन केले, ज्यामुळे
कार्यक्रमाची सुरळीत अंमलबजावणी झाली.
हा एफडीपी पूना कॉलेजच्या शैक्षणिक
उत्कृष्टतेच्या आणि नवकल्पनांच्या वचनबद्धतेला बळकटी देतो, संस्थात्मक स्वायत्ततेद्वारे शिक्षणात परिवर्तनशील बदल घडवून
आणण्यासाठी मार्ग मोकळा करतो.
सुमारे 100 सहभागी अध्यापकांना फॅकल्टी डेव्हलपमेंट
प्रोग्राममुळे लाभ झाला.
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اے کے آئی کے پوونا کالج آف آرٹس، سائنس اور کامرس، کیمپ، پونے نے 15 جنوری 2025 کو ’’کیوں خودمختاری؟‘‘ کے عنوان سے ایک روزہ فیکلٹی ڈیولپمنٹ پروگرام انعقاد کیا۔ یہ پروگرام کالج کے کانفرنس ہال میں منعقد ہوا اور اس کا مقصد تعلیمی خودمختاری کی اہمیت کو اجاگر کرنا تھا۔
پروگرام کی جھلکیاں
پروگرام کا آغاز محترم عمران قریشی کی تلاوتِ قرآنِ پاک سے ہوا۔ کالج کے پرنسپل ڈاکٹر اقبال شیخ نے خیر مقدمی خطاب میں پوونا کالج کی نمایاں خصوصیات اور تعلیمی خودمختاری کے اثرات پر روشنی ڈالی۔ نائب پرنسپل ڈاکٹر امجد شیخ نے مہمانِ خصوصی ڈاکٹر مہیش کاکڑے کا تعارف پیش کیا، جو ساوتری بائی پھولے پونے یونیورسٹی کے بورڈ آف ایگزامینیشن اینڈ ایویلیوایشن کے ڈائریکٹر ہیں۔
مہمانانِ گرامی
- مہمانِ خصوصی اور ریسورس پرسن: ڈاکٹر مہیش کاکڑے
- مہمانِ اعزاز: ڈاکٹر گوکل داس لوکھنڈے، اسسٹنٹ پروفیسر، ودیا پرتیشٹھان کالج آف ایجوکیشن
- معزز مہمان: مسٹر پردیپ کولی، ڈپٹی رجسٹرار، امتحانات شعبہ
انوویٹو اقدامات
پروگرام میں پوونا کالج کی جدید OneClick سوالیہ پیپرز اور QR کوڈ اقدامات پر روشنی ڈالی گئی، جس سے 3 لاکھ سے زائد طلبہ اور 500 سے زائد کالجوں کے لیے امتحانی مواد تک رسائی آسان ہو گئی ہے۔
کلیدی خطاب: ڈاکٹر مہیش کاکڑے
ڈاکٹر کاکڑے نے خودمختاری کے فوائد پر روشنی ڈالتے ہوئے کہا کہ یہ اداروں کو نصاب، تدریسی طریقوں، اور طلبہ کے جائزہ نظام میں آزادی فراہم کرتی ہے۔ ان کے خطاب کی نمایاں نکات:
- خودمختاری کی اہمیت: خودمختار ادارے عالمی معیار کے مطابق تعلیم کو ڈیزائن اور نافذ کر سکتے ہیں۔
- فائدے:
- نصابی آزادی
- تعلیمی معیار میں اضافہ
- گورننس میں بہتری
- عالمی سطح پر پہچان
- چیلنجز اور حل:
- تبدیلی کے خلاف مزاحمت
- بنیادی ڈھانچے اور تربیت میں سرمایہ کاری
- شفافیت اور احتساب
- امتحانات میں اصلاحات: ڈاکٹر کاکڑے نے پوونا کالج کے جدید اقدامات کی تعریف کی اور ان کو دیگر اداروں کے لیے مثال قرار دیا۔
اختتامیہ
پروگرام کا اختتام ڈاکٹر سید وکیل، سی ای او پوونا کالج، کے شکریہ کے کلمات سے ہوا۔ یہ ورکشاپ 100 سے زائد فیکلٹی ممبران کے لیے معلوماتی اور انسپائریشنل ثابت ہوئی۔








